खादर क्षेत्र में बढ़ी मगरमच्छों की आवाजाही, खेतों में काम करने और पशुओं को पानी पिलाने में बरतनी पड़ रही सावधानी

लक्सर। खादर क्षेत्र में मगरमच्छों की बढ़ती मौजूदगी ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। गंगा और आसपास की नदियों से निकलकर मगरमच्छ अब तालाबों, खेतों और आबादी के नजदीक तक पहुंच रहे हैं। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने और पानी का बहाव तेज होने पर मगरमच्छ सुरक्षित ठिकाने की तलाश में आबादी की ओर रुख कर लेते हैं।

लक्सर के खादर क्षेत्र में गंगा और सोलानी नदी के अलावा कई तालाब, पोखर और जलभराव वाले क्षेत्र मगरमच्छों के लिए अनुकूल माने जाते हैं। बरसात के दौरान जलस्रोतों का दायरा बढ़ने के साथ ही मगरमच्छों की आवाजाही का क्षेत्र भी बढ़ जाता है। ऐसे में खेतों में काम करने वाले किसानों के साथ ही तालाबों के आसपास जाने वाले ग्रामीणों के लिए खतरा बना रहता है।

वन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में लक्सर रेंज क्षेत्र में करीब 33 मगरमच्छों का रेस्क्यू किया गया था। इस वर्ष भी अब तक डेढ़ दर्जन से अधिक स्थानों से मगरमच्छों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जा चुका है। वन विभाग के अनुसार खादर क्षेत्र में मगरमच्छों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब वे आबादी के नजदीक पहुंचते हैं तो विभाग की ओर से रेस्क्यू अभियान चलाया जाता है।

क्षेत्र के कई गांवों में तालाब, पोखर और जलभराव वाले स्थानों पर अभी भी मगरमच्छों की मौजूदगी बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि तालाबों के आसपास मगरमच्छ दिखाई देने के बाद पशुओं को पानी पिलाने और खेतों में जाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।

वन क्षेत्राधिकारी महेंद्र गिरी के अनुसार खादर क्षेत्र मगरमच्छों के रहने और प्रजनन के लिए अनुकूल है। नदियों का जलस्तर बढ़ने पर कई बार मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं और पानी उतरने के बाद कई बार वापस नहीं लौट पाते। उन्होंने ग्रामीणों से जलस्रोतों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। मगरमच्छ दिखाई देने पर उसके नजदीक जाने या उसे पकड़ने का प्रयास न करें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें।

मगरमच्छ पहले भी कर चुके हैं ग्रामीणों पर हमले

खादर क्षेत्र में मगरमच्छों की मौजूदगी के साथ इनके हमलों का खतरा भी पहले सामने आ चुका है। वर्ष 2020 में रायसी क्षेत्र में बाण गंगा में फूल लेने गई एक बालिका पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। वर्ष 2022 में केहड़ा गांव के समीप एक महिला पर मगरमच्छ ने हमला किया था। वहीं वर्ष 2025 में डूंगरपुर गांव में तालाब के किनारे मौजूद एक ग्रामीण पर मगरमच्छ ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। ऐसे में जलस्रोतों के आसपास मगरमच्छों की बढ़ती आवाजाही ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।

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