ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित परिवहन का अभाव बना चुनौती, रोजाना जोखिम भरे सफर के बीच विद्यालय पहुंच रहे नौनिहाल
लक्सर। एक ओर शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर लक्सर के ग्रामीण इलाकों में कुछ नौनिहाल आज भी घोड़ा-बोगी के सहारे स्कूल पहुंच रहे हैं। गांवों से विद्यालयों की दूरी और सुरक्षित परिवहन के सीमित विकल्पों के बीच बच्चों का इस पारंपरिक साधन से आवागमन ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर रहा है।
लक्सर नगर में एक दर्जन से अधिक निजी विद्यालय संचालित हैं, जहां आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ने आते हैं। हालांकि, प्रत्येक परिवार के पास बच्चों को स्कूल छोड़ने और वापस लाने के लिए निजी वाहन या अन्य सुविधाजनक साधन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कुछ परिवार घोड़ा-बोगी का सहारा लेने को मजबूर हैं। यह स्थिति उन अभिभावकों की परेशानी को भी उजागर करती है, जिनके लिए बच्चों की शिक्षा के साथ उनके सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करना चुनौती बना हुआ है।
बढ़ते यातायात के बीच जोखिम भरा सफर
ग्रामीण सड़कों पर वाहनों की बढ़ती आवाजाही के बीच घोड़ा-बोगी से बच्चों का आवागमन चिंता का विषय है। खासकर व्यस्त सड़कों, संकरे रास्तों और अधिक यातायात वाले मार्गों पर दुर्घटना की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्कूल पहुंचने और छुट्टी के समय बच्चों की आवाजाही बढ़ने के कारण इस दौरान अतिरिक्त सतर्कता और सुरक्षा इंतजामों की जरूरत महसूस होती है।
बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण उनका सुरक्षित विद्यालय पहुंचना और घर लौटना भी है। ऐसे में सवाल उठता है कि ग्रामीण क्षेत्रों से निजी विद्यालयों में पढ़ने आने वाले बच्चों के सुरक्षित परिवहन के लिए क्या पर्याप्त विकल्प उपलब्ध हैं? विद्यालय प्रबंधन और संबंधित विभाग इस दिशा में क्या कदम उठा रहे हैं?
ग्रामीण परिवारों की आर्थिक परिस्थितियों और परिवहन सुविधाओं की कमी के बीच बच्चों का घोड़ा-बोगी से स्कूल जाना व्यवस्था के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है। जरूरत है कि बच्चों के आवागमन की स्थिति का गंभीरता से आकलन किया जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक उपायों पर विचार किया जाए, ताकि शिक्षा हासिल करने की राह में नौनिहालों को जोखिम भरे सफर का सामना न करना पड़े।
