लक्सर। चीनी के दामों में अचानक हुई बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर उत्तराखंड किसान मोर्चा ने कड़ी नाराजगी जताई है। चीनी के बढ़ते दामों का सीधा असर आम आदमी की रसोई के साथ-साथ होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट, चाय और मिठाई कारोबार पर भी पड़ने लगा है। वहीं रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक होने के कारण मिठाइयों के दाम और बढ़ने की संभावना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
पिछले कुछ दिनों में चीनी के दामों में तेजी से उछाल आया है। करीब 45 रुपये किलो बिकने वाली चीनी अब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। अचानक बढ़े दामों से घरेलू बजट प्रभावित होने के साथ ही मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की लागत भी बढ़ गई है। इसका असर बाजार में तैयार मिठाइयों की कीमतों पर दिखाई देने लगा है।
मिठाई कारोबारियों का कहना है कि चीनी समेत अन्य कच्चे माल की कीमत बढ़ने से उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। संजय नामदेव, शिवम, प्रमोद, प्रदीप, ललित, हरिओम और मनोज आदि ने बताया कि पहले करीब 400 रुपये किलो बिकने वाला घेवर अब 500 से 600 रुपये किलो तक पहुंच गया है। कारोबारियों के अनुसार लागत में हुई वृद्धि के चलते मिठाइयों के दाम बढ़ाना मजबूरी बन गया है।
वहीं गृहणियों निशा, उषा, सावित्री, रेखा, शिवांगी, सीमा और आंचल आदि ने कहा कि चीनी के बढ़ते दामों का असर घर की रसोई पर साफ दिखाई देने लगा है। चाय से लेकर पकवान और अन्य घरेलू जरूरतों में चीनी का इस्तेमाल होता है। ऐसे में कीमत बढ़ने से महीने का बजट प्रभावित हो रहा है।
उत्तराखंड किसान मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव संदीप बसेड़ी, जिलाध्यक्ष महकर सिंह और तहसील अध्यक्ष प्रधान सतवीर सिंह ने कहा कि चीनी के दाम बढ़ने का असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जिस अनुपात में चीनी के दाम बढ़ रहे हैं, उसी अनुपात में किसानों को गन्ने का उचित मूल्य भी मिलना चाहिए। किसान मोर्चा पदाधिकारियों ने सरकार से चीनी की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण करने के साथ ही किसानों के हित में गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग की है।
